आईए इस लेख के माध्यम से जानते हैं कि भारत मे बिना तलाक लिए भी हिन्दू धर्म में दूसरी शादी बिना तलाक लिए कब होगी लीगल-जैसा कि भारत में मुस्लिम पर्सनल लॉ, 1939 के तहत पुरुषों को बिना डाइवोर्स दूसरी शादी करने की कानूनी रूप से मिली है। लेकिन दूसरी तरफ, हिन्दू मैरिज एक्ट के तहत एक शादी के होते हुए दूसरी शादी करना कानूनन जुर्म है जिसके लिए IPC की धारा 494 के तरह 7 वर्ष कि सजा एवं जुर्माना या दोनों से दंडित करने का प्रावधान है । फिर भी कई बार हिन्दू धर्म के लोग भी लव-अफेयर्स , किसी मजबूरी या फिर अपने पार्टनर के अलगाव की वजह से लोग दूसरी शादी कर करने की गलती कर बैठते हैं। लेकिन भारत में दूसरी शादी कानूनी रूप से मान्य नहीं है। हालाँकि, कुछ स्पेशल सिचुऎशन्स में हिन्दुओं की दूसरी शादी भी लीगल है। आईये उन सिचुऎशन्स के बारे में विस्तार में जानते है।
हिन्दू धर्म में दूसरी शादी बिना तलाक लिए कब होगी लीगल :-
(1) पार्टनर की मृत्यु होने पर :-
यदि किसी महिला या पुरुष के पार्टनर की मृत्यु हो जाती है तो ऐसे मे उसके जीवित पार्टनर को दूसरी शादी करने के लिए तलाक की जरुरत नहीं पड़ती है। ऐसे मे वह अपने पार्टनर के डेथ सर्टिफिकेट को दिखाकर दूसरी शादी कर सकते है,फिर चाहे वह सामाजिक शादी कर रहे हो या कोर्ट मैरिज । समाज में कुछ वर्ष पहले तक विधवाओं का दोबारा शादी करना सही नहीं माना जाता था पर आजके दौर मे शिक्षित समाज और आधुनिक सोच के चलते यह सब बातें बहुत आम हो गई हैं अब लोग खुद से पहल करके विधवा महिलाओं कि शादी करवाने के लिए आगे आते हैं । और इसमें सरकार और कई एनजीओ भी आगे बढ़कर अपना योगदान दे रही है। कुछ राज्य सरकार द्वारा विधवाओं की दोबारा शादी के लिए आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाती है।
(2) कोर्ट के द्वारा शादी रद्द हो:-
यदि किसी भी कारण से कोर्ट द्वारा विवाहित जोड़ों की शादी रद्द / अमान्य कर दी जाती है। ऐसा उन्ही विवाह मे किया जा सकता है जो विवाह को शून्य या शून्यकरणीय योग्य हों । जिसका वर्णन हिन्दू विवाह अधिनियम के धारा 11-12 में विस्तार से बताया गया है । ऐसे में बिना तलाक लिए ही शादी खत्म हो जाती है इसलिए डाइवोर्स लेने की जरूरत नहीं पड़ती है दूसरी शादी कि जा सकती है । इस अधिनियम के अंतर्गत किसी कपल की शादी रद्द होने के कई कारण हो सकते हैं जिसकी पूरी जानकारी के लिए अधिनियम में दी गई धाराओं को पढ़ने कि जरूरत है । जिसके कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं – नाबालिग़ शादी होना, दोनों मे से किसी एक पार्टनर का मानसिक संतुलन ठीक ना होना, कपल के बीच सपिण्डा रिलेशन (Prohibited Marriage) होना आदि ।
3) पार्टनर का 7 सालों से या उससे अधिक समय तक लापता होना :-
अगर किसी व्यक्ति का पति या पत्नी लगातार 7 सालों तक या उससे अधिक समय से लापता है और वर्तमान मे उसकी कोई खबर नहीं है कि वह जीवित है भी या नहीं, तो ऐसे मे दूसरे पार्टनर को डाइवोर्स लेने की कोई जरूरत नहीं पड़ती है, वह बिना तलाक हुए भी शादी कर सकता है । लेकिन,यह शादी तभी संभव है जब व्यक्ति का पार्टनर कमसे कम लगातार 7 सालों से लापता हो और उसे ढूंढने की पूरी कोशिस की गई हो तथा सारी कोशिशें असफल रही हो । ऐसा साबित करने के लिए पुलिस मे दर्ज गुमशुदा रिपोर्ट और अखबार मे छपी गुमशुदा की तलाश जैसे लेख के माध्यमों का सहारा लिया जा सकता है ।
4) धर्म बदलकर बिना तलाक कर सकते हैं दूसरी शादी :-
भारतीय संविधान में सभी धर्मों में शादी के लिए अलग-अलग कानून नियम व शर्तें बनाई गई हैं। जैसे हिन्दू मैरिज एक्ट के अनुसार, एक जीवित पार्टनर के होते हुए अगर कोई दूसरी शादी करता है बशर्तें उसकी पहली शादी शून्य , अमान्य या पार्टनर कि मृत्यु या पार्टनर के सात वर्षों से लापता जैसी श्रेणी में न आती हो तो ऐसे में बिना तलाक के की गई उसकी दूसरी शादी अमान्य मानी जाएगी ऐसी शादी का कानून की नजर में कोई वजूद नहीं होगा । इसे आईपीसी के सेक्शन 494 के तहत दंडनीय अपराध कि श्रेणी मे भी रखा गया है। कोर्ट करने वाले व्यक्ति को दोषी मानकर 7 साल तक की जेल की सज़ा और जुर्माना या फिर दोनोंसे दंडित कर सकती है। साथ ही दूसरी पत्नी को पत्नी के सभी कानूनी हक अधिकारों से वंचित भी रखा जाता है । परंतु हाई कोर्ट द्वारा कुछ मामले मे सिर्फ दूसरी शादी करने के लिए धर्म बदलने को लेकर फटकार लगाते हुए यह कहा है कि सिर्फ शादी के लिए धर्म बदलना स्वीकार नहीं होगा । जबकि उदाहरण के लिए मशहूर अभिनेता धर्मेन्द्र एवं इंडियन फिल्म डायरेक्टर एवं प्रोड्यूसर महेश भट्ट जैसे कई अन्य लोगों का उदाहरण लिया जा सकता है जिन्होंने शादी करने के लिए अपना धर्म बदला है ।
जबकि मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार, पुरुषों को चार शादियां करने की अनुमति प्रदान की गई है। लेकिन मुस्लिम महिला को दूसरी शादी करने के लिए अपने पहले पति से डाइवोर्स लेने कि जरूरत इसमे भी पड़ती है यानि कोई मुस्लिम पति बिना तलाक चार शादी भी कर सकता है पर मुस्लिम महिला को ऐसा करने के लिए अपने पहले पति से तलाक लेना होगा उसके बाद ही वह दूसरी शादी कर सकती है । पर अगर किसी का पार्टनर अपना धर्म परिवर्तन कर लेता है , तो वह बिना तलाक लिए भी दूसरी शादी कर सकता है।
इस पोस्ट के माध्यम से साझा कि गई जानकारी भारतीय संविधान में निहित कानूनी प्रक्रिया को लेकर बताई गई है – जो इसका पालन न करते हुए कानून को तोड़ना है इसके लिए वह व्यक्ति स्वयं जिम्मेदार होगा यदि समाज का कोई व्यक्ति बिना तलाक से दूसरी शादी करता है इन नियमों मे निहित शर्तों मे अयोग्य होते हुए भी तो ऐसे में यदि उसकी पत्नियाँ चाहे तो अपने पति के खिलाफ कानूनी कारवाई कर सकती है ।
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