What are the laws and rights against feticide भ्रूण हत्या के खिलाफ क़ानून एवं अधिकार क्या हैं ?
इस पोस्ट के माध्यम से आपको बताने का प्रयास किया गया है की भ्रूण हत्या क्या है क्यों किया जाता है तथा इसे रोकने के लिए क़ानून में क्या प्रावधान है कन्या भ्रूण हत्या करना आज के समाज में आम बात होती जा रही है, जिसके कई वजह है कुछ लोग बेटे की चाह में बेटी की भ्रूण हत्या करते है तो कही बेटी पैदा करना ही पाप माना जाता है,कुछ लोग ग़रीबी के कारण बेटी का विवाह करने में असमर्थ होने की वजह से बेटी पैदा नही करना चाहते इसलिए उन्हें जन्म से पहले माँ की कोख में ही मार देते हैं । समाज में इन्हीं तरह की कुछ रूढ़िवादी प्रथावों एवं कुरीतियों के चलते भ्रूण हत्या काफ़ी तूल पकड़ता जा रहा है, इसके बढ़ते दुरपयोग तथा इस अपराध को रोकने के लिए क़ानून द्वारा कुछ कठोर कदम उठाए गये हैं ।जिसके उपयोग से इन्हें रोका जा सकता है , कुछ हैड तक इसे रोकने में सफलता पायी भी गयी है । लेकिन पूरी तरह से इसका दुरपयोग तभी रोका जा सकता है जब समाज में जागरूकता हो तथा लोग इसे रोकने की खुद पहल करें । पूरी जानकारी के लिए कृपया पोस्ट को अंत तक पढ़ें –
भ्रूण हत्या क्या है :- भ्रूण हत्या का मतलब है कि जन्म से पहले होने वाले बच्चे की हत्या कर देना फिर चाहे वह लड़का हो या लड़की ।
भ्रूण हत्या के खिलाफ क़ानून एवं अधिकार क्या हैं –
प्रसवार्थ निदान तकनीकि (दुरुपयोग का विनियम व निवारम) अधिनियम, 1994
लिंग की जांच एवं उसकी हत्या के खिलाफ कानून गर्भ में पल रहे बच्चे के लिंग की जांच करना या करवाना ।शब्दों या इशारों से गर्भ में पल रहे बच्चे के लिंग के बारे में बताना या पता करना । गर्भ में पल रहे बच्चे के लिंग की जांच कराने का विज्ञापन देना ।गर्भवती महिला को उसके गर्भ में पल रहे बच्चे के लिंग के बारे में जानने के लिए उकसाना या इच्छा पैदा करना ।यदि कोई व्यक्ति रजिस्ट्रेशन करवाए बिना प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीएनडीटी) अर्थात अल्ट्रसाउंड इत्यादि मशीनों का इस्तेमाल करे। जांच केंद्र के मुख्य स्थान पर यह लिखवाना अनिवार्य है कि यहां पर भ्रूण के लिंग की जांच नहीं की जाती । कोई भी व्यक्ति अपने घऱ पर भ्रूण के लिंग की जांच के लिए किसी भी तकनीक का प्रयोग नहीं करेगा। गर्भवती महिला को उसके परिजनों या अन्य के द्वारा लिंग जांचने के लिए प्रेरित करना या जबरब दबाव बनाकर जाँच करवाना ।
कानून का उल्लंघन करने पर सजा :- पहली बार कानून का उल्लंघन करने पर 3 साल की कैद व 50 हजार रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।दूसरी बार पकड़े जाने पर 5 साल की कैद व 1 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।लिंग की जांच करने का दोषी पाए जाने पर क्लीनिक का रजिस्ट्रेशन भी रद्द कर दिया जायेगा।
विकारों की पहचाने के लिए पूर्व निदान तकनीकों का इस्तेमाल :-
गणसूत्र संबंधी विकृति की पहचान आनुवांशिक उपापचय रोग की पहचानरक्त वर्णिका संबंधी रोग की पहचानलिंग संबंधी आनुवांशिक रोग की पहचानजन्मजात विकृतियों की पहचानकेंद्रीय पर्यवेक्षक बोर्ड द्वारा संसूचित अन्य समानताएं एवं रोगों की पहचान आदि।
प्रसव पूर्व निदान तकनीक के इस्तेमाल की शर्तें :-
गर्भवती स्त्री की उम्र 35 साल से अधिक हो। गर्भवती स्त्री के दो या दो से अधिक गर्भपात या गर्भस्राव हो चुके हों। गर्भवती स्त्री नशीली दवा, संक्रमम या रसायनों जैसे सशक्त विकलांगता पदार्थों के संसर्ग में रही हो। गर्भवती स्त्री या उसके पति की मानसिक मंदता या संस्तंभता जैसे किसी शारीरिक विकार या अन्य किसी आनुवांशिक रोग का पारिवारिक इतिहास रहा हो।केंद्रीय पर्यवेक्षक बोर्ड द्वारा संसुचित कोई अन्य अवस्था है ।
गर्भ का चिकित्सीय समापन अधिनियम, 1971 :- कानूनी तौर पर गर्भपात की शर्तेंजब (गर्भपात) तब कराई जा सकती है जब गर्भ की वजह से महिला की जान को खतरा हो। महिला के शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य को खतरा हो ।गर्भ बलात्कार के कारण ठहरा हो ।बच्चा गंभीर रुप से विकलांग या अपाहिज पैदा हो सकता हो ।महिला या पुरुष द्वारा अपनाया गया कोई भी परिवार नियोजन का साधन असफल रहा हो। गर्भवती स्त्री डॉक्टर की सलाह से 12 हफ्तों तक गर्भपात करना सकती है।1 2 से ज्यादा तक 20 हफ्ते से कम गर्भ को गिरवाने के लिए दो डॉक्टर की सलाह लेना जरुरी है। 20 हफ्ते के बाद गर्भपात नहीं करवाया जा सकता है। गर्भवती स्त्री का जबरदस्ती गर्भपात करवाना अपराध है। गर्भपात क़ानूनी तौर पर केवल सरकारी अस्पताल या निजी चिकित्सा केंद्र जहां बी फार्म लगा हो, में सिर्फ रजिस्टर्ड डॉक्टर द्वारा ही करवाया जा सकता है ।
कानून का उल्लंघन करने पर सजा :-
धारा 313 के अनुसार स्त्री की सहमति के बिना गर्भपात करवाने वाले को आजीवन कारावास या जुर्माने की सजा दी जा सकती है । धारा 314 के अनुसार गर्भपात के दौरान स्त्री की मौत हो जाने पर 10 साल का कारावास या जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है। धारा 315 के अनुसार नवजात को जीवित पैदा होने से रोकने या जन्म के बाद उसको मारने की कोशिश करने का अपराध करने पर 10 साल की सजा या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है ।
हिमाचल प्रदेश में भ्रूण की जांच पर अनोखी पहल –
हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा गर्भ में पल रहे बच्चे का लिंग जांच करवाकर उसकी हत्या करने वाले लोगों की जानकारी देने वाले को 10 हजार रुपए नकद ईनाम देने की घोषणा की है ।इससे इस तरह के अपराध करने वाले व्यक्ति को पकड़ने में आसानी होगी तथा अपराध को बढ़ने से रोका जा सकेगा।तथा इनाम पाने की वजह से लोगों में जानकारी देने की उत्सुकता भी बढ़ेगी ।
भारत में कन्या भ्रूण हत्या के प्रमुख कारण :-
बेटियों की तुलना में बेटों द्वारा पुश्तैनी खेत पर काम करने या पारिवारिक व्यवसाय, आय अर्जन या वृद्धावस्था में माता-पिता को सहारा देने की संभावना अधिक होती है । विवाह होने पर लड़का, बहू लाकर घर की लक्ष्मी में वृद्धि करता है,जो घरेलू कार्य में अतिरिक्त सहायता भी देती है और दहेज के रुप में आर्थिक लाभ पहुंचाती है , जबकि लड़कियां विवाहित होकर चली जाती हैं तथा दहेज के रुप में आर्थिक बोझ होती हैंस्त्री की हिकारत के पीछे सामाजिक-आर्थिक उपयोगिता संबंधी कारक यह है कि चीन की तरह, भारत में पुरुष संतति एवं पुरुष प्रधान परिवारों में यह परंपरा है कि वंश चलाने के लिए कम से कम एक बेटा होना जरुरी है । तथा कई बेटे होने पर परिवार का ओहदा अतिरिक्त बढ़ जाता है ।इसके साथ ही साथ अशिक्षा ग़रीबी एवं जागरूकता की कमी तथा अंधविश्वास की वजह से भी इस तरह के अपराध को बढ़ावा मिलता है ।लोगों के दीमाक में एक सोच बनी है की हमारा वंश सिर्फ़ बेटा चला सकता है बेटी नहीं ।
निष्कर्ष -समाज यदि पढ़ा लिखा होगा तभी उसका विकास पूर्ण रूप से हो पता है, शिक्षा की कमी एवं ग़रीबी ही व्यक्ति को तमाम तरह के अपराध करने के लिए ही बढ़ावा देता है ।समाज से यह दोनो यदि पूर्णरूप से हट जाए तो एक अच्छा विकसित समाज अपराध एवं रूढ़िवादिता से मुक्त मिलेगा ।महिलाओं को लेकर लोगों की सोच आज भी बहुत कुंठित सी लगती है । तभी तो हर प्रकार से महिलाओं को ही दबाया जाता है । इसे रोकने का सबसे अच्छा एवं कारगर उपाय एक शिक्षित समाज की स्थापना है खाश तौर पर महिला की शिक्षा पर हमें विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है एक शिक्षित महिला एक परिवार को अच्छी नीव एवं संस्कार से सकती है ।
आशा करते हैं हमारा लेख आपको पसंद आया होगा इस तरह के किसी अन्य मुद्दे पर जानकारी के लिए आप हमें ईमेल या कमेंट करके पूँछ सकते है ।
धन्यवाद
द्वारा – रेनू शुक्ला, अधिवक्ता / समाजसेविका
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