पति की सम्पत्ति पर केवल पहली पत्नी को दावा करने का अधिकार – बॉम्बे हाई कोर्ट
Only first wife has the right to claim husband’s property
एक तरफ़ शादी जहां समाज का एक अनिवार्य हिस्सा है, वहीं दूसरी तरफ़ बदलते दौर एवं सामाजिक परिवेश में बदलाव के चलते आज कल समाज में शादी को लेकर बहुत तनाव भी देखने को मिल रहा है, कुछ लोगों को यह एक सामाजिक बंधन लगता है तो कुछ लोगों को शादी के कुछ दिनों बाद ही आपसी रिश्ते में काफ़ी तनाव से भी गुजरना पड़ता है।जिसके चलते अक्सर लोगों की शादियाँ टूट जाती है।समाज में शादी को चलते बने दबाव की वजह से लोगों को दोबारा शादी भी करना पड़ता है। इस तरह की स्थिति उत्पन्न होने के साथ साथ दो शादियों के बीच सम्पत्ति को लेकर बँटवारे की वजह से तनाव शुरू हो जाता है इसी तरह के एक मामले में बाम्बे हाई कोर्ट का एक अहम फ़ैसला सामने आए है आइए जानते है क्या पूरा मामला –
बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay high court) ने एक केस में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि कानून के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति की दो पत्नियां हैं एवं दोनों उसके धन पर दावा करती हैं तो केवल पहली पत्नी का ही दावा करने एवं सम्पत्ति पर अधिकार है, लेकिन जब बात ब्च्चों की हो तो दोनों शादियों से पैदा हुए बच्चों को धन पाने का अधिकार है,जस्टिस एसजे कथावाला एवं जस्टिस माधव जामदार की पीठ द्वारा यह मौखिक टिप्पणी की गयी है, राज्य सरकार द्वारा यह भी बताया गया कि हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ द्वारा इसी तरह का एक फैसला पहले दिया गया था जिसको ध्यान में रखते हुए पीठ द्वारा यह टिप्पणी की गयी है।
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जस्टिस कथावाला की अध्यक्षता पीठ महाराष्ट्र रेलवे पुलिस बल के सहायक उपनिरीक्षक पद पर कार्यरत सुरेश हाटनकर की दूसरी पत्नी की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, हाटनकर की 30 मई को कोविड-19 से मृत्यु हो गई थी , राज्य सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक ड्यूटी के दौरान कोविड-19 से मरने वाले पुलिसकर्मियों को 65 लाख का मुआवजा देने पारित किया गया है, जिसके उपरांत हाटनकर की पत्नी होने का दावा करने वाली दो महिलाओं ने मुआवजा राशि पर अपना अधिकार जताते हुए याचिका लगायी है।
जिसके बाद में हाटनकर की दूसरी पत्नी की बेटी श्रद्धा ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए कहा कि मुआवजा राशि में उन्हें आनुपातिक हिस्सेदारी मिलनी चाहिए ताकि वह एवं उसकी मां भूखमरी एवं बेघर होने से बच सकें, तथा उनका जीवन यापन हो सके राज्य सरकार की वकील ज्योति चव्हाण ने पीठ से कहा कि जब तक उच्च न्यायालय इस बात पर निर्णय करता है कि मुआवजे का हकदार होगा तब तक राज्य सरकार मुआवजा राशि अदालत में जमा कर देगी, चव्हाण ने औरंगाबाद पीठ के फैसले से भी अदालत को अवगत कराया है।
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इसके बाद अदालत ने कहा, ‘कानून कहता है कि दूसरी पत्नी को कुछ भी नहीं मिल सकता है, लेकिन दूसरी पत्नी से पैदा हुई बेटी एवं पहली पत्नी तथा पहली शादी से पैदा हुई बेटी क़ानूनी रूप से धन की अधिकारी है आपको ज्ञात हो की Covid – 19 के चलते अभी सुनवायी अदालत में पेश न होके वीडियो कांफ्रेंस से करवायी जा रही है इस याचिका की सुनवायी भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पूरी की गयी हाटनकर की पहली पत्नी शुभदा एवं दंपति की बेटी सुरभि भी वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सुनवाई में उपस्थित रहे एवं इस बात से साफ़ इनकार भी किया कि उन्हें बिल्कुल भी इस बात की जानकारी नहीं है कि हाटनकर का दूसरा परिवार भी है।
फ़िलहाल श्रद्धा की वकील प्रेरक शर्मा ने अदालत से कहा कि सुरभि एवं शुभदा को हाटनकर की दूसरी शादी के बारे में पता है एवं पहले वे सुरभि से फेसबुक पर संपर्क कर चुके हैं।इस केस का अभी कोई लिखित निर्णय नहीं आया है परंतु दी गयी दलीलों द्वारा इस बात का साफ़ अंदाज़ा लगाया जा सकता है की फ़ैसला क्या होगा। तथा बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा की गयी टिप्पणी से यह साबित भी हो जाता है की दूसरी पत्नी को पति की सम्पत्ति पर कोई क़ानूनी अधिकार नहीं है।परंतु दोनो विवाह से उत्पन्न बच्चों को उनका हक़ ज़रूर दिया जाएगा।
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द्वारा – रेनू शुक्ला, अधिवक्ता / समाजसेविका
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