One year LLM course to end, new all India entrance test compulsory for post graduation course
एक साल का एलएलएम कोर्स समाप्त होगा, पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स के के लिए नया ऑल इंडिया एंट्रेंस टेस्ट अनिवार्य
हाल ही में बार काउन्सिल आफ इंडिया (BCI) ने भारतीय राजपत्र द्वारा एक अधिसूचना जारी कर एक बार फिर से लॉ में मास्टर करने वालों को चौका दिया है। मामला यह है की 2013 में शुरू की गयी लॉ मास्टर डिग्री LLM जोकि दो वर्ष से घटाकर एक वर्ष के लिए कर दी गयी थी BCI द्वारा भारतीय राजपत्र में अधिसूचित किया गया है की अब LLM एक वर्ष की मान्यता रद्द कर दी जाएगी। साथ ही साथ पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स के के लिए नया ऑल इंडिया एंट्रेंस टेस्ट अनिवार्य कर दिया जाएगा । अब LLM दो वर्ष एवं चार समेस्टर के नियम के साथ ही मान्य होगा। आइए जानते हैं विस्तार से क्या है पूरा मामला –
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा लीगल एजुकेशन (पोस्ट ग्रेजुएट, डॉक्टोरल, एग्जीक्यूटिव, वोकेशनल, क्लीनिकल एंड अदर कंटीन्यूइंग एजुकेशन) रूल्स, 2020 को अधिसूचित किया गया है, जिसमें लॉ (एलएलएम) में एक साल की मास्टर डिग्री को खत्म करने का प्रयास किया गया है। जिसे भारत में 2013 में सरूँ किया गया था।आएए जानते है नए नियम के अनुसार इसमें क्या परिवर्तन की सम्भावना रखी जा सकती है।
क्या है बदलाव के बाद का नया नियम ” विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा 2013 में भारत में शुरू किए गए (अधिसूचना के अनुसार) एक वर्ष की अवधि की लॉ मास्टर डिग्री प्रोग्राम इस अकादमिक सत्र तक ऑपरेटिव एवं मान्य रहेगी । इसी दौरान नए नियमों को अधिसूचित एवं लागू करने का प्रयास किया जाएगा, लेकिन इसके बाद देश के किसी भी विश्वविद्यालय में ये मान्य नहीं होगा।” नया नियम जनवरी 2021 में अधिसूचित किए गए हैं जिनके अनुसार यह कहा गया कि पोस्ट ग्रेजुएट (स्नातकोत्तर डिग्री) लॉ में मास्टर डिग्री एलएलएम चार सेमेस्टर में दो साल की अवधि का ही अब मान्य होगा। इसके अलावा, एलएलएम पाठ्यक्रम केवल कानून स्नातक तक ही सीमित है। नए नियम में यह भी कहा गया है कि “बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) (या तो सीधे एक टेस्ट के माध्यम से) प्रतिवर्ष सभी विश्वविद्यालयों में लॉ में मास्टर डिग्री कोर्स में प्रवेश के लिए पोस्ट ग्रेजुएट कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (पीजीसीईटीएल) आयोजित करवा सकती है। जब पीजीसीईटीएल पेश किया जाएगा, तब संबंधित विश्वविद्यालयों द्वारा इसका पालन किया जाएगा तथा अनिवार्य होगा । पीजीसीईटीएल शुरू करने के बाद छात्रों को टेस्ट की मेरिट सूची द्वारा हाई प्रवेश देना अनिवार्य रहेगा। ” नियम में यह भी कहा गया है कि पीजीपीएल पाठ्यक्रम (एलएलएम कार्यक्रम) का इंट्रोड्यूज़ करना एवं उसे सुचारु रूप से संचालित करना विश्वविद्यालय की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी है जिसे किसी भी संबद्ध संस्थानों को लागू नहीं किया जा सकता है। अन्य शर्तें :-
i) कोई भी विश्वविद्यालय किसी भी व्यक्ति को किसी भी विषय या क्षेत्र या अनुशासन में स्नातक (या एलएलबी) की डिग्री (एलएलएम) प्रदान नहीं कर सकता है न ही वह मान्य होगी।
ii इस प्रकार की डिग्री, BA.LL.B. या BBA.LL.B या B.Sc. LL.B. कम से कम पांच साल की अवधि के अध्ययन के बाद ही प्रदान की जाए ।
जमीयत-उलमा-ए-हिंद ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कानूनों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में… ओपन सिस्टम में किसी भी स्नातक, जैसे बिजनेस लॉ या ह्यूमन राइट, या एलएलबी / आईबीएल / एलएलबी के बिना अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून की पेशकश की कानून की किसी विशेष शाखा में मास्टर डिग्री अपेक्षित प्रवेश स्तर योग्यता के रूप में नामांकित नहीं किया जा सकेगा । लॉ (एलएलएम) में मास्टर डिग्री के रूप में नामांकन नही किया जा सकेगा परंतु किसी भी अन्य मास्टर डिग्री के लिए नामांकित किया जा सकता। बिजनेस लॉ में मास्टर डिग्री (एमबीएल) के लिए नामांकित किया जा सकता है तथा मास्टर इन गवर्नेंस एंड पब्लिक पॉलिसी (एमजीपीपी), मास्टर इन ह्यूमन राइट्स (एमएचआर), मास्टर ऑफ इंडस्ट्रियल लॉज (एमआईएल) आदि, पर यह नियम लागू नही होंगे। लेकिन इन सभी डिग्रियों को एलएलएम के समकक्ष नहीं माना जा सकता है ।
लॉ एलएलएम एक एक ऐसी डिग्री जो विदेशी विश्वविद्यालय से प्राप्त की गई हो , जो समकक्ष एलएलबी के बिना की गई हो, भारतीय एलएलएम डिग्री के समकक्ष नहीं मानी जाएगी । एलएलएम के समान मान्यता प्राप्त करने के लिए। किसी भी विदेशी विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री में परास्नातक डिग्री प्राप्त करने के बाद ही एलएलबी किया जाना चाहिए तभी मान्य होगा । किसी भी विदेशी विश्वविद्यालय से प्राप्त एक वर्षीय एलएलएम डिग्री भारतीय एलएलएम के समकक्ष नहीं है।
हालाँकि एक वर्ष एल.एल.एम. समकक्ष एलएलबी के बाद प्राप्त की गई डिग्री किसी भी मान्यता प्राप्त विदेशी विश्वविद्यालय से डिग्री कम से कम एक वर्ष के लिए एक भारतीय विश्वविद्यालय में एक विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में नियुक्त होने के लिए संबंधित व्यक्ति को हक दिला सकती है, ताकि इस तरह के एक वर्ष एलएलएम पर विचार किया जा सके। विजिटिंग फैकल्टी / इंटर्न फैकल्टी / क्लिनिकल फैकल्टी के रूप में एक वर्ष के शिक्षण अनुभव के साथ डिग्री एक वर्ष की अवधि के लिए प्राप्त मास्टर डिग्री के समकक्ष मानी जा सकती है।
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