You can get compensation of Rs 50 lakh for accident caused by gas cylinder – know how
आम तौर पर हमारे समाज से आयी खबरों में अकसर ऐसी घटनाएं देखने को मिलती है जहां घर में रखा गैस सिलेंडर फटने से दुर्घटना होती है । इस प्रकार के हादसों में अक्सर पीडि़त परिवार को कई बार जान और माल दोनों का नुकसान उठाना पड़ता है । आजकल तो बदलते समाज एवं बड़ते सोशल मीडिया का उपयोग इस प्रकार की घटनाओं का आडियो, वीडियो तथा फ़ोटो आसानी से साझा किया जा सकता है और देखने को भी मिलता है साथ ही सिलेंडर फटने के कुछ लाइव वीडियो भी सोशल मीडिया पर देखे जा सकते हैं । अचानक से होने वाली इस वारदात के कारण लोगों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है कई बार जान से भी हाथ धोना पड़ता है। लेकिन बहुत ही कम को यह पता है कि एलपीजी से जुड़ी दुर्घटनाओं में पीडि़तों को मुआवजा भी उसी कंपनी से मिलता है जिसका वह सिलेंडर इस्तेमाल कर रहे होते है । एक ग्राहक होने के नाते आपको आपके इस अधिकार की जानकारी होनी चाहिए इसी बात को ध्यान में रखते हुए आज हम आपसे इसी मुद्दे से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी साझा कर रहे हैं ।
इंश्योरेंस कवर-
कोई भी LPG यानी रसोई गैस कनेक्शन लेने पर पेट्रोलियम कंपनियां ग्राहक को पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस कवर मुहैया कराती हैं, जिसकी क़ीमत 50 लाख रुपये तक होता है । जो कि सिलेंडर से गैस लीकेज, ब्लास्ट के चलते या फिर दुर्भाग्यवश हुए हादसे की स्थिति में पीडि़त को आर्थिक मदद के तौर पर प्रदान किया जाता है । उपभोक्ता के इस इंश्योरेंस के लिए पेट्रोलियम कंपनियों की बीमा कंपनियों के साथ पहले से ही साझेदारी रहती है । वर्तमान में कुछ कम्पनियों की साझेदारी जैसे हिंदुस्तान पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम के रसोई गैस कनेक्शन पर इंश्योरेंस ICICI लोम्बार्ड के माध्यम दिया जाता है ।
कौन है ज़िम्मेदार –
सिलेंडर में लीकेज या ब्लास्ट होने की स्थिति में इसकी पूर्ण रूप से जिम्मेदारी डीलर एवं गैस कंपनी की होती है । लगभग 16 साल पहले हुए एक सिलेंडर हादसे पर नैशनल कंज्यूमर फोरम की ओर से पीडि़त को बीमा कवर देने का आदेश दिया गया था । नेशनल कंज्यूमर फोरम ने अपने फैसले में स्पष्ट रुप से यह ज़ाहिर किया था कि मार्केटिंग डिस्प्लिन गाइडलाइंस 2014 फॉर एलपीजी डिस्ट्रिब्यूशन के तहत यह तय है कि डीलर ने डिफेक्टिव सिलिंडर सप्लाई किया तो वह अपनी जिम्मेदारी शिकायतकर्ता पर नहीं थोप सकता है । गाइडलाइंस के अनुसार डीलर को डिलिवरी से पहले ही पूरी तरह चेक करना चाहिए कि सिलेंडर बिल्कुल ठीक है या नहीं इस तरह की अधिकतर घटनाएँ सुरक्षा जाँच में की गयी लापरवाही के कारण देखने को मिलती है ।
कितना है मुआवज़ा –
बीमा कवर को समझने के लिए यह जान लेना बेहद ज़रूरी है कि एलपीजी सिलेंडर की वजह से हुए हादसों में नुकसान के हेतु मुआवजा देनदारी प्रति घटना 50 लाख रुपये सुनिस्चित की गयी है एवं प्रति व्यक्ति 10 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा कबर दिया जाता हैं । घरों में हुए हादसों में मुआवजा तब मिलता है जब हादसा गैस एजेंसी के साथ रजिस्टर्ड ग्राहक के घर पर ही हुआ हो । एलपीजी सिलेंडर की वजह से हुए हादसे में हुए जान-माल के नुकसान के लिए पर्सनल एक्सीडेंट कवर देय द्वारा मुआवज़ा देय है । कमर्शियल स्तर पर यह नियम लागू नहीं होता है उसके नियम अलग हैं ।
मुआवजा किस प्रकार तय किया जाता है-
- हादसे में ग्राहक की प्रॉपर्टी/घर को नुकसान पहुंचता है तो प्रति एक्सीडेंट 2 लाख रुपये तक का इंश्योरेंस क्लेम दिया जाता है ।
- हादसे में मौत होने पर एक्सीडेंट प्रति व्यक्ति 6 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता है ।
- हादसे में घायल होने पर मेडिकल खर्च हेतु प्रति एक्सीडेंट 30 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता है, जो प्रति व्यक्ति 2 लाख रुपये तक का होता है ।
- साथ ही प्रति व्यक्ति 25000 रुपये तक की तुरंत राहत सहायता भी प्रदान की जाती है ।
कैसे मिलेगा 50 लाख का क्लेम –
अब सवाल ये आता है कि गैस सिलेंडर पर 50 लाख का क्लेम कैसे मिल सकता है मायएलपीजी.इन (http://mylpg.in) के मुताबिक, जब भी कोई व्यक्ति एलपीजी कनेक्शन लेता है और उस सिलेंडर से उसके घर में कोई दुर्घटना हो जाती है तो वह व्यक्ति 50 लाख रुपये तक के बीमा का हकदार होता है । दुर्घटना होने पर अधिकतम 50 लाख रुपये तक का मुआवजा प्राप्त किया जा सकता है । एक्सीडेंट से पीड़ित प्रत्येक व्यक्ति को अधिकतम 10 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया जाता है ।
जानें पूरी प्रक्रिया –
दरअसल पेट्रोलियम कंपनियों इंडियन ऑयल, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम एवं भारत पेट्रोलियम के वितरकों को यह बीमा कराना अनिवार्य है बाध्य होने की वजह से उन्हें सभी ग्राहक का बीमा करवाना पड़ता है । इन लोगों को ग्राहकों एवं अन्य प्रॉपर्टीज हेतु थर्ड पार्टी बीमा कवर सहित दुर्घटनाओं के लिए बीमा पॉलिसी लेना अनिवार्य रखा जाता है।
यदि कोई हादसा हो जाता है तो ग्राहक को इसकी सूचना हो सके तो तुरंत अन्यथा 30 दिन के अंदर पुलिस स्टेशन एवं एलपीजी वितरक को देनी होती है। बीमा रकम का दावा करने हेतु एफआईआर की कॉपी, घायलों के इलाज के खर्च का बिल एवं किसी की मृत्यु होने पर उसकी रिपोर्ट आदि महत्वपूर्ण काग़ज़ात के रूप में लगाए जाते है सूचना दिए जाने के बाद संबधित अधिकारी हादसे के कारणों की जांच करता है और अगर दुर्घटना एलपीजी की वजह से हुई हो तो वितरक गैस कंपनी को इसकी जानकारी देकर अपनी रिपोर्ट भी सौंपता है।
जब आप अपने एलपीजी वितरक (डिस्ट्रीब्यूटर) को हादसे के संबंध में जानकारी देते हैं तो वो संबंधित ऑयल कंपनी एवं इंश्योरेंस कंपनी को इसकी सूचना देता है । डिस्ट्रीब्यूटर ही कस्टमर को क्लेम के लिए जरूरी फॉर्मेलिटीज पूरी करवाने में मदद करता है। डिस्ट्रीब्यूटर्स एवं कस्टमर सर्विस सेल के पास सभी डिटेल्स मौजूद होती हैं।
ध्यान रखने योग्य बातें –
सिलेंडर खरीदते वक्त ही ग्राहक का इन्श्योरेंस हो जाता है जो सिलेंडर की एक्सपायरी डेट से जुड़ा होता है और इसके साथ ही समाप्त हो जाता है। अक्सर लोग सिलेंडर की एक्सपायरी डेट चेक किए बिना ही इसे खरीद लेते हैं। ऐसी स्थिती में आप इंश्योरेंस के लिए क्लेम करने के हकदार नहीं रह जाते हैं।
ऐसे चेक करें एक्सपायरी डेट –
हर गैस सिलेंडर पर जहां रेग्युलेटर लगाया जाता है, वहां पर D-20 या इसी प्रकार से कुछ और नम्बर लिखा होता है। यह गैस सिलिंडर की एक्सपायरी डेट बताता है। यहां पर D-20 से मतलब है कि गैस सिलेंडर की एक्सपायर डेट दिसंबर 2020 तक है । इसके बाद गैस सिलेंडर का उपयोग करना खतरनाक हो सकता है। ऐसे सिलिंडर में गैस लीकेज एवं अन्य तरह की दिक्कतें आ सकती हैं। गैस सिलिंडर के सबसे ऊपर रेगुलेटर के पास जो तीन पट्टी बनी होती है, उन में से किसी एक पर A, B, C, D लिखा होता है। गैस कंपनी हर एक लेटर को 3 महीनों में बांट कर रखती है। यहां पर A का मतलब जनवरी से मार्च एवं B का मतलब अप्रैल से जून तक ,इसी तरह से C का मतलब जुलाई से लेकर सितंबर और D का मतलब अक्टूबर से दिसंबर तक का होता है। इसी के द्वारा आप अपने गैस सेलेंडर के एक्स्पायर होने की तारीख़ का अंदाज़ा लगा सकते है।एवं अपनी सुरक्षा का ध्यान रख सकते है।
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एक समाजसेविका की कलम से –
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